शुक्रवार, 8 अक्तूबर 2010

इश्क के जाले

इश्क के जाले की
बिसात क्या है बता ?
जो पता न हो
इश्क की मकडी से पूछ
वो बतायेगी  अपने  जालों  की
खूबसूरती,
मुलामियत,
इनायत,
और
रंग-ऐ-खुश्बुओं की किस्में
हर किस्म की
अपनी  ख़ास  पहचान है
हर पहचान  के ख़ास खरीददार  है
खरीददारों  के अपने ख़ास एह्सास है
जिनकी  ख्वाहिश में
जाने कहाँ दूर-दूर से
कारवां आते है
काफ़िले जुड़ते है
कोई पैदल
तो कोई
ऊंट-घोड़ों मे सवार
दिल की सवारी का लुत्फ़ उठाते है
मन्ज़िले-ए-इश्क का पता न पूछ 
किसी से
ये वो राह है दीवानों
जिस पर कदम
खुद-ब-खुद बढ़ जाते है
न ज़ोर-न ज़बरदस्ती
न धक्कम-धुक्की
न रेलम-पेल
मचती है यहाँ
सब का अपना  सफ़र है
सबकी अपनी  मन्ज़िल है
सब इस अहसास के लिए बढ़ जाते हैं
जिसने  महसूस  किया
वो सब कुछ लुटाता है यहाँ
लुटकर शहंशाह  बन जाता है
जिसको  हासिल न हुआ ये अहसास
वो भी यहाँ  
इस रंग में रंग जाता  है
इस फ़ाकामस्ती के दीवाने  है कई
पर
इश्क की मकडी के
ढंग निराले  है यहाँ
वो होती  है मेहरबां कभी-कभी
कभी-कभी खुलते  हैं
इस जन्नत की बगिया के दरवाज़े.......
मैंने
छोड़ दिया है
दुनिया के रहमो-करम पर जीना
बरसों-बरस से बैठी हूँ
इस इंतज़ार में
कि
ज़िन्दगी होगी मेहरबां मुझ पर
खुलेंगे दर इस इबादतगाह के
बनेंगे इश्क के
उम्दा जाले मेरे लिए
जिनपे बुनुंगी मैं
इश्क की मखमली चादर
उन जादुई जालों से करुँगी
एक छोटी-सी गुज़ारिश
दे दें मुझे वो
चंद बीज-ए-इश्क
जिन्हें
बाटूंगी
बिखेरुंगी
लुटाऊँगी
और
उगाउंगी
इश्क की धानी-सुनहरी फ़स्लें......

4 टिप्‍पणियां:

emoticons ने कहा…

ऐसे गहरे भाव पकड़्ते कभी कुछ छूट भी सकता है.
"जाने कहाँ दूर-दूर से कारवां आते है
काफ़िले जुड़ते है
कोई पैदल तो कोई ऊंट-घोड़ों मे सवार "....

"मैंने छोड़ दिया है दुनिया के रहमो-करम पर जीना बरसों-बरस से बैठी हूँइस इंतज़ार में किज़िन्दगी होगी मेहरबां मुझ परखुलेंगे दर इस इबादतगाह के बनेंगे इश्क के उम्दा जाले मेरे लिए जिनपे बुनुंगी मैंइश्क की मखमली चादरउन जादुई जालों से करुँगी एक छोटी-सी गुज़ारिश दे दें मुझे वो चंद बीज-ए-इश्क जिन्हें बाटूंगीबिखेरुंगीलुटाऊँगीऔरउगाउंगीइश्क की धानी-सुनहरी फ़स्लें......"

पर यह प्यास जब तक बाकी है, जब तक ये मन सन्तुष्ट नहीं, तभी तक ऐसी अभीव्य्क्ती संभव है.फ़िर भी चाहुंगा कि मिल जाये तुम्हें वो उम्दा जाले और बन जाये तुम्हारे लिये वो मखमली चादर..

अगर तुम्हें लगता है कुछ छूटा सा तो उसे जोड़ कर खबर करना. नहीं तो हम तो खुश रहेंगे कुछ नयॆ की आस में.

अनुपमा त्रिपाठी... ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ...
एकदम बाँध लिया आपने भावों के जाल में ...!!

prerna argal ने कहा…

bahut sunder shabdon ko khoobsurati se baandhkar iska ko alag dhang se paribhasit karati hui shaandaar gajal.badhaai aapko.


please visit my blog.thanks.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

इश्क की मकड़ी और इसके जले ..भाव मयी प्रस्तुति