रविवार, 3 अक्तूबर 2010

श्रेष्ठता

गर्मी, ठण्ड और बारिश के मौसम के बीच अपने को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ चल रही थी।
गर्मी ने तल्खी से कहा-"मेरे आये बगैर कोई ठंडक के एहसास को नहीं समझ सकता।
ठण्ड ने इतराते हुए फ़रमाया कि मैंही हूँ जो हर दिल को गुनगुनी धूप और रिश्तों की ऊष्मा देती हूँ
इस तरह के तर्क-वितर्क ने झगडे का रूप ले लिया।
बढ़ते झगडे से बारिश व्यग्र हुई , परेशान हुई।
जब कुछ सूझा नहीं तो बहुत तेज़ बरस गयी ।
इस बारिश के साथ ही बरखारानी दोनों के घमन्ड और अहम को अपने साथ बहा ले गयी।
इसके बाद इन दोनों मौसमों में कभी तकरार नहीं हुई।

3 टिप्‍पणियां:

प्रशान्त ने कहा…

अगले पोस्ट का इंतिज़ार रहेगा

kalpana ने कहा…

agla post kab aa raha hai?

Arpita ने कहा…

कोशिश रहेगी जब कुछ उमड़ा......