बुधवार, 17 नवंबर 2010

याद

हवा में बिखरी....
खुश्बू में महकी...
बहती...
बिखरती...
...मचलती...
साँसों के रास्ते
लहू में घुलती...
नस-नस को समेटे
तन-मन को अपने काफ़िले में सजाती
हौले से...बहुत हौले से...
दस्तक दे
चौंकाती...
चुभलाती...
और
सहला जाती मनचले मन को......
.............................................तुम्हारी याद!!!!!

1 टिप्पणी:

chutka jagrati manch narayanganj ने कहा…

ek yad aati hai,
dusri yad se milwati hai,
dono yad kuch bat karti hai,
phir hame paresan karti hai,