सोमवार, 1 नवंबर 2010

लड़की

तुम
मुस्कुराओ..
हंसो..
ठहाके लगाओ..
बतियाओ..
गप्पे मारो..
बात-बेबात
कंधे पर थपकी भी मारो..
प्रेम की बातें करो..
सपने बुनो..
पर
प्रेम न करो........

3 टिप्‍पणियां:

सुशीला पुरी ने कहा…

वाह !!! क्या बात है !!!!!!!!!!!!

स्वप्निल कुमार 'आतिश' ने कहा…

अलग ..बेहद अलग ..जहां ब्लॉगजगत मे एक तरफ रूटीन टाइप की कविताओं की भरमार है ..ऐसे मे यह कविता एक अलग तरह की ताजगी लिए बेहद अच्छी लगी ...हाँ पर कविता मुझ पर बहुत ददर से खुली .... और जब खुली तो रौशनी के साथ .,...दीवाली की शुभकामनायें ..यात्रा ज़ारी रखें ...

प्रदीप कांत ने कहा…

तुम
मुस्कुराओ..
हंसो..
ठहाके लगाओ..
बतियाओ..
गप्पे मारो..
बात-बेबात
कंधे पर थपकी भी मारो..
प्रेम की बातें करो..
सपने बुनो..
पर
प्रेम न करो........

छोटी किंतु अच्छी कविता