सोमवार, 17 जनवरी 2011

स्मृति.....

प्रवाल-सी अनूठी
शैवालों-सी रंग-बिरंगी
मीन-सी व्याप्त
मन के समंदर में........
 
तैरती....विचरती....
रहस्यों में ख़ुद को खोजती...
 
कुछ चुनती
कुछ बीनती
कुछ बिखेरती..
सहसा
विचलित-सी/बियाबां में भटकती
हांफती-दौड़ती
छू जाती सघन तारामंडल
प्रकाशित जो
स्मृति के उजास से......

11 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर ने कहा…

बहुत ही प्यारे शब्द और बहुत ही प्यारी कविता.

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मिले सुर मेरा तुम्हारा - नया बनाम पुराना

sagebob ने कहा…

बहुत बढ़िया बिम्ब .दिल को छू गयी. आप की कलम को सलाम

यशवन्त माथुर ने कहा…

आप सब को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं.
सादर
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गणतंत्र को नमन करें

Sunil Kumar ने कहा…

विचलित-सी/बियाबां में भटकती
हांफती-दौड़ती
छू जाती सघन तारामंडल
प्रकाशित जो
स्मृति के उजास से......
bahut sundar abhivykti badhai
shayad aapke vlag par main pahlibar aya

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

प्रिय अर्पिता जी
सस्नेह अभिवादन !

स्मृति रचना बहुत अच्छी लगी
कितने कितने बिंब आपने प्रयुक्त किए हैं -
प्रवाल-सी, शैवालों-सी, रंग-बिरंगी मीन-सी …

सुंदर ! अनुपम !
आपकी लेखनी अबाध - निर्बाध चलती रहे …
बहुत शुभकामनाएं हैं !

साथ ही आपको तीन दिन पहले आ'कर गए
विश्व महिला दिवस की हार्दिक बधाई !
शुभकामनाएं !!
मंगलकामनाएं !!!

♥मां पत्नी बेटी बहन;देवियां हैं,चरणों पर शीश धरो!♥


- राजेन्द्र स्वर्णकार

यशवन्त माथुर ने कहा…

आप को सपरिवार होली की हार्दिक शुभ कामनाएं.

सादर

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 17/06/2011 को आपकी कोई पोस्ट नयी-पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है.
आपके सुझावों का हार्दिक स्वागत है .

धन्यवाद!
नयी-पुरानी हलचल

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्रवाल-सी अनूठी
शैवालों-सी रंग-बिरंगी
मीन-सी व्याप्त
मन के समंदर में...

अच्छे बिम्ब उभारे हैं रचना में ..सुन्दर अभिव्यक्ति

अनुपमा पाठक ने कहा…

सुंदर!

S.N SHUKLA ने कहा…

bahut sundar srijan, badhai.
please visit my blog too.

बेनामी ने कहा…

आपकी रचना सुंदर है -बस ऐसे ही लिखती रहिये -धन्यवाद